लोकलाइज़ेशन से जुड़ी चुनौतियां: लोकलाइज़ेशन से जुड़ने वाले नए ब्रैंड्स के लिए सुझाव

Written by: Umesh

अगर भाषाएं किसी किरदार की तरह होतीं, तो बेशक अंग्रेज़ी अपने अच्छे बर्ताव के चलते हमारी एक अच्छी साथी होती लेकिन असल में देखा जाए तो स्थानीय भाषा ही हमारी सच्ची दोस्त होती है, जिससे हम हंसी-मज़ाक से लेकर सुख-दुख तक, हर बात शेयर करते हैं. आज दुनिया के सभी ब्रैंड अपने ग्राहकों के लिए ऐसा ही ‘सच्चा दोस्त’ बनने की हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं. भले ही उन्हें बड़ी तादाद में लोगों से जुड़ने के लिए, कई स्थानीय भाषाओं को अपनाना पड़े लेकिन वे हर उस भाषा के ज़रिए लोगों से जुड़ना चाहते हैं जो सिर्फ़ बातचीत ही नहीं बल्कि भावनाएं ज़ाहिर करने का भी ज़रिया हो. 

लोकलाइज़ेशन की वजह से उद्योगों का लोगों से जुड़ने का तरीका समय के साथ तेज़ी से बदल रहा है. मीडिया के ज़रिए, कोई भी मैसेज अब कम से कम समय में ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंच सकता है. लोगों से भावनात्मक तौर पर जुड़ने के लिए, व्यक्तिगत जुड़ाव पर अधिक ज़ोर दिया जा रहा है. आज के समय में यह सभी उद्योगों की ज़रूरत बन गई है. मुकाबला मुश्किल होता जा रहा है और बाज़ार में हिस्सेदारी कम होती जा रही है. खुद को अपने प्रतिद्वंद्वियों से बेहतर बनाना काफ़ी चुनौती भरा हो गया है. किसी भी कारोबार के लिए इस मुश्किल माहौल में, लोकलाइज़ेशन की सफल रणनीति से ही ऐसे बाज़ारों तक पहुंचा जा सकता है जो अब तक पहुंच से दूर थे. भाषाओं की मदद से, मौजूदा बाज़ारों में भी कारोबार को बढ़ाया जा सकता है. हालांकि, यह उतना आसान नहीं है. लोकलाइज़ेशन के दौरान, ब्रैंड्स को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. हमारे पास ब्रैंड और भाषाओं को समझने का कई वर्षों का अनुभव है. इसी आधार पर, हम आपको लोकलाइज़ेशन की पांच मुख्य चुनौतियों के बारे में बता रहे हैं.

1. भाव खो देना

लोकलाइज़ेशन कोई नई चीज़ नहीं है. मीडिया और प्रकाशन उद्योग काफ़ी पहले से अलग-अलग भाषाओं में कॉन्टेंट उपलब्ध कराते रहे हैं. उनका मुख्य प्रॉडक्ट ‘कॉन्टेंट’ होने के कारण, वे अनुवाद और लोकलाइज़ेशन की प्रक्रिया से जुड़ी बारीकियों को बेहतर ढंग से समझते हैं. हालांकि, ज़्यादातर नए ब्रैंड लोकलाइज़ेशन करते हुए भाषा को बहुत अहमियत नहीं देते हैं, जबकि यह लोगों से जुड़ने के लिए बेहद ज़रूरी है. इस तरह के संगठनों के मुख्य अधिकारियों को भी लोकलाइज़ेशन से जुड़े निर्णय लेने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. उन्हें ऐसा लगता है कि लोकलाइज़ेशन होने पर कॉन्टेंट का मूल भाव खत्म हो सकता है. संगठन यह कैसे पक्का कर सकते हैं कि उनके ब्रैंड का मुख्य संदेश स्थानीय भाषा में भी उसी तरह ग्राहकों तक पहुंचेगा जैसा कि वे चाहते हैं? लोकलाइज़ेशन में कम भरोसा होने की वजह से, कई कंपनियां बड़े अवसरों को छोड़ सुरक्षित रास्ता अपनाती हैं. लोकलाइज़ेशन पर भरोसा करने वाली कंपनियां, इसे सही तरह से अपनाकर सफलता की एक नई इबारत लिख रही हैं.

2. प्राथमिकता से जुड़ा पेचीदा सवाल

हर ब्रैंड के पास अपने ग्राहकों से जुड़ने के कई खास तरीके होते हैं. ज़्यादातर मामलों में, ब्रैंड्स या तो स्थानीय भाषा में कॉन्टेंट को पूरी तरह से लोकलाइज़ कराना नहीं चाहते या फिर उनके पास इसके लिए संसाधन नहीं होते. इस स्थिति में, यह तय करना काफ़ी मुश्किल होता है कि इसकी शुरुआत कहां से की जाए. इस सवाल का जवाब पाने के लिए, एक ब्रैंड को ग्राहकों से जुड़ने के हर तरीके को भाषा के हिसाब से परखना चाहिए और समझना चाहिए कि किन क्षेत्रों में इसका असर सबसे ज़्यादा होगा. माना जाता है कि सबसे अच्छी तरह पेश की जाने वाली चीज़ें ही सबसे ज़्यादा फ़ायदा देती हैं. यह एक विज्ञापन, वेबसाइट का लैंडिंग पेज या किसी प्रॉडक्ट का इंटरफ़ेस भी हो सकता है. ये तरीके किसी ग्राहक को तेज़ी से अपनी ओर खींचते हैं और ऐसा अनुभव देते हैं जो उन्हें पसंद आता है. ब्रैंड की बेहतर इमेज के लिए यह ज़रूरी भी होता है. इन तरीकों से ही स्थानीय भाषा के लिए एक बेहतरीन रणनीति की शुरुआत होती है. इस रणनीति को लगातार तब तक अपनाया जाना चाहिए, जब तक कि पूरे कॉन्टेंट को किसी खास भाषा में बदल नहीं दिया जाता. इसी तरह, बाज़ारों के हिसाब से यह तय किया जाना चाहिए कि लोकलाइज़ेशन के समय किन भाषाओं को प्राथमिकता देनी है.

3. सही पार्टनर चुनना

यह ज़रूरी नहीं कि सभी ब्रैंड्स के पास भाषा और संस्कृति के विशेषज्ञ हों. स्थानीय भाषा से जुड़ी रणनीति कितनी सफल रहेगी, यह काफ़ी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि लोकलाइज़ेशन पार्टनर को सही तरीके से चुना गया है या नहीं. हम यहां ‘पार्टनर’ शब्द का इस्तेमाल इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि लोकलाइज़ेशन के लिए यही नज़रिया सबसे काम का है. एक बेहतर ब्रैंड ऐसी एजेंसी के साथ ही साझेदारी करेगा जो उसके मुख्य लक्ष्यों को समझती हो और उन्हें बेहतर तरीके से पेश कर सकती हो. किसी नई एजेंसी को ब्रैंड की सोच के मुताबिक तैयार किए जाने के मुकाबले यह कहीं ज़्यादा आसान है. एक बेहतर साझेदार के साथ ही आपसी विश्वास पनप सकता है और तभी कोशिशें मज़बूत हो पाती हैं. सफलता के लिए यह लिए बेहद ज़रूरी है और व्यावसायिक रिश्तों में इस बात की काफ़ी अहमियत है!

4. लोकलाइज़ेशन और अनुवाद के बीच का फ़र्क़

इस वाक्य पर ध्यान दीजिए, “There is no set rule that a well-set brand should rule a market like a monopoly. In fact there is a thumb rule that states that any brand that tries to do so will only fall like a set of cards”. इस वाक्य में ‘Set’ और ‘Rule’, दोनों शब्दों का तीन बार इस्तेमाल किया गया है और तीनों बार इन्हें अलग-अलग संदर्भों के साथ पेश किया गया है. कुछ अनुवादक शब्दशः अनुवाद करने की कोशिश करते हैं. ऐसे में, उनसे वे गलतियां भी हो सकती हैं जिनसे वाक्य का मतलब ही बदल जाए. दूसरी ओर, स्थानीय जगह के हिसाब से अनुवाद करने वाला व्यक्ति (लोकलाइज़र) वाक्य के भाव और मतलब को समझकर, उसे एक अलग भाषा में पेश करता है. भाषा एक मज़ेदार चीज़ है, लेकिन गलती होने पर अर्थ का अनर्थ भी हो सकता है. इस तरह की गलतियां आम लोगों को पढ़ने में मज़ेदार लग सकती हैं, लेकिन इसमें शामिल ब्रैंड्स के लिए यह बेहद शर्मनाक होता है. हमें याद रखना चाहिए कि लोकलाइज़ेशन उन क्षेत्रों में से एक है जो अब भी मशीनीकरण के असर से बचे हुए हैं. इस क्षेत्र में, मशीन अभी तक मनुष्य की जगह नहीं ले पाई है. यह बहुत ज़रूरी है कि संदर्भ को ध्यान में रखकर ही लोकलाइज़ेशन किया जाए और शब्दशः अनुवाद से बचा जाए!

5. गुणवत्ता के साथ-साथ कुशलता भी

कुशल व्यवसाय की खासियत होती है कि उसमें शामिल लोग हमेशा अपनी कार्यक्षमता में सुधार करने का तरीका ढूंढते रहते हैं. गलतियों से सीखने, अवसर का लाभ उठाने, प्रक्रिया को आसान बनाने, और कार्यक्षमता को बढ़ाने का काम लगातार चलता रहना चाहिए.

प्रौद्योगिकी ने कंप्यूटर एडेड ट्रांसलेशन (CAT) टूल की मदद से लोकलाइज़ेशन उद्योग में एक नई क्रांति को जन्म दिया है. भाषा में जितनी कला है, उतना ही बड़ा योगदान लोकलाइज़ेशन के पीछे विज्ञान का भी है. यह भाषा के हिसाब से बदलाव करने के लिए पर्याप्त अवसर देता है. इस विज्ञान को समझना एक नए लोकलाइज़ेशन ब्रैंड के लिए आसान होगा, क्योंकि यह संख्याओं और तर्क के क्षेत्र से जुड़ा हुआ है. यह बेहद ज़रूरी है कि आपका लोकलाइज़ेशन पार्टनर आपकी ज़रूरतें पूरी करने के लिए ऐसे तरीके निकाले जिनमें तकनीक का इस्तेमाल हो और वह उन तरीकों को बेहतर तौर पर लागू भी कर सके.

इन सभी बातों के बारे में सोचने के बाद, स्थानीय भाषा से जुड़ना बेशक ज़्यादा फ़ायदेमंद नजर आता है. बस यह ध्यान रखें कि आपका ब्रैंड सही सोच और सही पार्टनर के साथ आगे बढ़े.

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